यहाँ प्रस्तुत सभी संकीर्तन जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित हैं। इन संकीर्तनों की विशेषता यह है कि इनकी शब्द-रचना अत्यंत सरल एवं सुगम होने के साथ-साथ ये तत्त्वज्ञान एवं ब्रज रस से परिपूर्ण हैं। इन संकीर्तनों को सुनने वाला श्रोता सहज ही इन मधुर धुनों में खो जाता है और उस सुख, शांति एवं आनंद की अनुभूति करने लगता है,















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FROM RAAGAS TO REMIX: HINDI FILM MUSIC THROUGH THE DECADES (1940–2000)
There is something truly special about the "Golden Era" of Hindi cinema that is hard to replicate. Listening to these tracks is like stepping into a hand-painted dream, where the melodies carry the fragrance of rain-soaked earth and the gentle glow of a flickering lamp. Ultimately,
दिलकश गज़लों की महफिल (BEST OF GHAZALS)
जहाँ दिल है वहाँ दर्द है, जहाँ दर्द है वहाँ आह है, जहाँ आह है वहाँ शायर है और जहाँ शायर है वहाँ गज़ल है। यहाँ किसी अभागे दिल को ठेच पहुँचना जरुरी है ताकि किसी गज़ल का जन्म हो और उस दर्द-ए-दिल को किसी शायरी में पिरोकर हम उत्सव मनाये! गज़ल की शुरुआत होती है एक दिल की 'आह' से और इसका अंत होता है श्रोताओं की 'वाह' से !
लोकप्रिय गीतों के खजाने से : १९९०-९९ (BEST SONGS OF THE 90S)
१९९०-९९ का दशक हिंदी फिल्म संगीत के लिए मानो एक सुकूनभरी वापसी का संदेश लेकर आया - एक ऐसा मोड, जहां धडकनों की चकाचौंध से हटकर भावनाओं की गहराई फिर से केंद्र में आ बैठी। आशिकी और मैंने प्यार किया जैसी अपार सफलता पाने वाली फिल्मों ने संगीत को फिर से प्रेम, कोमलता और संवेदनाओं के रंगों में रंग दिया। यह समय था जब श्रोताओं के मन में पुरानी मधुरता की प्यास जाग उठी, और संगीत ने उसी अनुरूप अपनी दिशा बदली।
यादगार गीतों का कारवां : १९८०-८९ (BEST SONGS OF THE 80S)
१९८०-८९ का दशक हिंदी फिल्म संगीत के लिए एक ऐसा दौर रहा, जिसने श्रोताओं को बांटा भी और चकित भी किया। इस समय संगीत एक नए मोड पर खडा था - जहां परंपरा और आधुनिकता आमने-सामने थीं। दशक के आरंभिक वर्षों में डिस्को की चमकदार लहर छा गई, जिसने सुरों की दुनिया को एकदम नई दिशा दी।
सदाबहार सुरों की सरगम : १९७०-७९ (BEST SONGS OF THE 70S)
१९७०-७९ का दशक भी भावनाओं से भीगे एकल गीतों और चुलबुले युगलों की मधुर परंपरा को साथ लेकर आगे बढा। पर अब समय बदल रहा था—स्टूडियो की सीमित सादगी से निकलकर निर्देशन की नवोन्मेषी दृष्टि ने संगीत को नई उडान दी। पूरब और पश्चिम के सुर आपस में घुलने लगे, और संगीत में एक नई ताजगी, एक नई ऊर्जा जन्म लेने लगी।
सुनहरे दौर की सुरीली धुनें : १९६०-६९ (BEST SONGS OF THE 60S)
१९६० से १९६९ का दशक हिंदी फिल्म संगीत के आकाश में रंगों, रागों की रंगीन छटा लेकर आया। इस काल में वाद्य संयोजन और अधिक समृद्ध हुआ, और धुनों की मिठास मानो हर हृदय में मधुर तरंगें जगाने लगी। संगीत अब केवल सजावट नहीं रहा - वह सिने-कहानी की आत्मा बन गया, जो भावनाओं को गहराई से व्यक्त करने का माध्यम बन गया।
सुरीले दौर के अमर गीत : १९५०-५९ (BEST SONGS OF THE 50S)
१९५० से १९५९ का दशक हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है - एक ऐसा युग, जहां सुरों ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि आत्मा को छू लेने वाली गीतों को जन्म दिया। इस काल तक अभिनेताओं द्वारा स्वयं गीत गाने की परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त हो चुकी थी, और पार्श्वगायन की कला ने पूर्णता प्राप्त कर ली थी। इस परिवर्तन ने गायन को एक नई ऊंचाई दी - अधिक परिष्कृत, अधिक भावपूर्ण और अधिक प्रभावशाली। इस उन्नति के पीछे नौशाद जैसे महान संगीतकारों का अद्भुत योगदान रहा, जिन्होंने संगीत को गरिमा और गहराई प्रदान की।
गुजरे दौर के यादगार गीत : १९४०-४९ (BEST SONGS OF THE 40S)
१९४७ में जब भारत ने स्वतंत्रता की स्वर्णिम भोर का स्वागत किया, उससे बहुत पहले ही यहाँ का फिल्मी संगीत जनमानस के हृदय में अपनी गहरी जडें जमा चुका था। उस युग के सुरों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा बसती थी - हर धुन में रागों की गहराई, हर प्रस्तुति में भावों की गंभीरता झलकती थी।
CHRONIC FATIGUE SYNDROME: THE HIDDEN GLOBAL EPIDEMIC
Chronic Fatigue Syndrome is likely one of the largest yet least recognized epidemics of the modern world.
सोने-चांदी घेताय? तर मग हे नक्की वाचा !
दुधापासून ते औषधांपर्यंत सगळीकडे भेसळीचं साम्राज्य असताना सोन्याच्या शुद्धतेची तरी काही गॅरंटी आहे का ? हो नक्कीच आहे, डोळे उघडे ठेऊन गेलात तर, नाहीतर.... आहेच ताप, संताप आणि पश्चात्ताप ठरलेला. सोने (चांदीपण) रोज स्वतःचेच विक्रम मोडत चाललेले असताना ते दिवसागणिक अधिकाधिक मौल्यवान आणि दुर्मिळ होत जाणार यात शंका नाही.
राजेश रोशन के सदाबहार सुपरहिट गानें (BEST SONGS OF RAJESH ROSHAN )
अपने महान पिता से प्राप्त मधुर संगीत की विरासत को जिन्होंने आगे बढाया और एक से बढकर एक सुरीले गीतों की रचना की, ऐसे संगीतकार राजेश रोशन द्वारा रचित कुछ यादगार गीत : 

A LIFE RECLAIMED: THE DAWN OF DIALYSIS
With her tissues oversaturated with toxins that triggered periodic convulsions, Ellie’s chances of survival looked grim. She had ingested insecticide in a desperate attempt to terminate an unwanted pregnancy. Could the dialysis unit—which had failed in previous trials so far—succeed in saving her life?
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