यहाँ प्रस्तुत सभी संकीर्तन जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित हैं। इन संकीर्तनों की विशेषता यह है कि इनकी शब्द-रचना अत्यंत सरल एवं सुगम होने के साथ-साथ ये तत्त्वज्ञान एवं ब्रज रस से परिपूर्ण हैं। इन संकीर्तनों को सुनने वाला श्रोता सहज ही इन मधुर धुनों में खो जाता है और उस सुख, शांति एवं आनंद की अनुभूति करने लगता है, जिसकी खोज में वह दिन-रात लगा हुआ है। आइए, इन दिव्य मधुर संकीर्तनों का आनंद लें।
१. ठाकुर युगल किशोर हमारो, चाकर हम पिय प्यारी के
२. मैं तो राधे राधे गाऊं कालिंदी तट पे
३. मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण
४. जय राधे जय राधे राधे
५. मेरे तो आधार है राधा के चरणारविंद
६. नित सेवा माँगू श्यामा श्याम तेरी
७. गोपाला गोपाला गिरिधर गोविन्द गोपाला
८. मैं तो राधे राधे गाऊं कालिंदी तट पे
९. हमारो धन राधा राधा राधा
१०. राधे राधे गोविंदा, राधे राधे गोविंदा
११. राधे गोविन्द गोविन्द गोविन्द राधे
१२. श्रीराम जय राम जय जय राम
१३. जय नंदनन्दन सुखधाम हरे
१४. हम चाकर प्रीतम प्यारी के
१५. लाखों महफिल जहाँ में यूँ तो
१६. थेई थेई नंदकुमार नचत ता
१७. नाचे नंदनन्दन थेई थेई थेई थेई
१८. राधे राधे श्री राधे राधे राधे
१९. श्री राधे राधे गोविन्द राधे
२०. मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण
२१. मतवारी प्यारी चाल मेरो यशुदा को लाल
२२. राधे राधे गोविंदा, राधे राधे गोविंदा
२३. जयति गुरुवर जयति गुरुवर जयति गुरुवर प्यारे
२४. जो पिय रुचि मह रुचि राखे, प्रेमरस सोई चाखे रे
२५. तुम मेरे थे मेरे हो मेरे रहोगे
२६. सपनो देख्यों रात सखी इक
२७. राधे राधे गोविन्द, गोविन्द राधे - परिक्रमा
२८. राधे गोविन्द गोविन्द राधे राधे
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